Bhojpuri Poem | भोजपुरी कविता | मन के भरम | 2021

New Bhojpuri Poem | भोजपुरी कविता | मन के भरम | 2021

 1.रात के कइसे जागल जाला ,तहरा का मालूम ? 

जिनगी कइसे जारल जाला ,तहरा का मालूम ? 

 

तु त खाली घर में बइठ के, रोटी पकवले बारु  

घाम में कइसे पाकल जाला तहरा का मालूम ? 

 

लाठी गोली बन्दुख त ,कमजोर के निशानी ह 

बात से कइसे मारल जाला ,तहरा का मालूम  

 

तु खाली कबूतर मुर्गी ,पोसाईल देखले बारऽ 

साढ़ के कइसे नाथल जाला,तहरा का मालूम ?

 

जब सगरे अन्हार होखे , आन्ही तूफान होखे 

त दिया कइसे बारल जाला,तहरा का मालूम ?  

 

कागज के काट लेहल , बड़ी आसान ह बाबू 

दुखवा कइसे काटल जाला,तहरा का मालूम ?


Raat ke kaise jaagal jaala ,

Tahara ka maaloom ? 

Jinagee kaise jaaral jaala ,

Tahara ka maaloom ? 

Tu ta khaalee ghar mein baith ke, 

Rotee pakavale baaru ghaam mein kaise paakal jaala tahara ka maaloom ? 

Laathee golee bandukh ta ,

Kamajor ke nishaanee ha baat se kaise maaral jaala ,

Tahara ka maaloom tu khaalee kabootar murgee ,

Posaeel dekhale baar saadh ke kaise naathal jaala,

Tahara ka maaloom ? 

Jab sagare anhaar hokhe , 

Aanhee toophaan hokhe ta diya kaise baaral jaala,

Tahara ka maaloom ? 

Kaagaj ke kaat lehal , 

Badee aasaan ha baaboo dukhava kaise kaatal jaala,

Tahara ka maaloom ?

Bhojpuri Poem | भोजपुरी कविता | मन के भरम | 2021


Bhojpuri Poem | भोजपुरी कविता 

2.कपाड़ फुट जाला 

त जुट जाला

हड्डियों टूट जाला 

त जुट जाला

बाकी ना जुटेला

एगो दिल के टूटल

आ आँखी से

एगो लोर के फुटल


टूटल, फुटल, फेर जुटल

प्रकिरती के नियम ह

बाकी

कुछ त जरूर बा

जवन एक बार टूट जाये त 

दोबारा ना जुड़े

जइसे ना जुड़े कवनो मजदूर के

टूटल पान सौ के नोट 

जइसे दोबारा ना जुड़े 

सियन के जोड़ल पेवन


पहिले मतभेद होला 

फेर मनभेद होला

आ फेर सीधे दिल में छेद होला

पथर रागड़ाला त आग होला

बात रागड़ाला त घाव होला

आदिमी रागड़ाला त चोट होला

विचार रागड़ाला त मन छोट होला


कागज के पान्ना फाट जाये

त साटा जाला

घाव कइसनको होखे 

एकदिन भरा जाला

बाकी ना भराये

एगो मन के भरम

आ ना सटाये

दोबारा फेर करम


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ